ॐ जय श्री जीण माताOm Jai Shri Jeen Mata: a second Jeen Mata Aarti
Another Jeen Mata Aarti, “ॐ जय श्री जीण माता”, in seven couplets that each close with “ॐ जय”. It describes Mataji’s shringar and the joy of darshan.

ॐ जय श्री जीण माता, जय श्री जीण माता।जो ध्यावत जग झंझट, उसका कट जाता ।। ॐ जय।।
रत्न जड़ित सिंहासन, अद्भुत छवि न्यारी।सिर पर छत्र लसत है, राजत महतारी ।। ॐ जय।।
कर कंगन, मुख बेसर, गल माला सोहे।मस्तक बिंदिया दमके, मुनि जन मन मोहे ।। ॐ जय।।
उमा रमा है तू ही, ही ब्रह्माणी।सिंह वाहिनी तू ही, महिमा जग जानी ।। ॐ जय।।
झांझ मृदंग नगारों की ध्वनि अति प्यारी।दर्शन कर मैया के हर्षित नर नारी ।। ॐ जय।।
जय अम्बे महामाया, जय मंगल करणी।वरदायिनी जय जननी, जय जय अघ हरणी ।। ॐ जय।।
जो भी इस आरती को प्रेम सहित गावे।कहे चिरंजी वो निश्चय सुख सम्पत्ति पावे ।। ॐ जय।।
Traditional aarti, given here as published in devotional collections; it is less widely published than “ओम जय श्री जीण मइया”. The last couplet carries the signature line “कहे चिरंजी”, which is part of the sung text.